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Horror Story Part 1

इस कहानी का किसी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सबंध नही है यह एक काल्पनिक कहानी है जिसको सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाया गया है।
Writer Name - Unknown


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Horror Story In Hindi


घोड़ो के कदमों की आवाज़ थक थक करती हुई रात गए उस सुनसान जंगल के बीचों बीच के खुले सड़क से आ रही थी जल्द ही चाँदनी रौशनी के आलम में कुछ सैनिक घोड़े पे सवार होके तेज़ कदमो से घोड़े पे बेदर्दी से लगाम को पकड़े दौड़ा रहे थे…सभी सैनिकों ने काले लिबास पहन रखे थे और आँखों में ग़ुस्से की अंगार


धाध ढाढ ढाढ… की घोड़ो के दौडने से सन्नाटे में वह आवाज़ और घोड़ो की चीख जो निकलें जा रही थी उन शब्दों से साफ़ था की वह लोग जल्द ही ठहरने वाले थे कुछ कदम दौड़ते ही घोड़ो की दिशा सीधे जंगल के खत्म होते ही उस बड़े महल की और जाने लगी…। सैनिक चाबुक मारते हुए तेज़ी से घोड़ो को राज महल के ठीक सामने की और दौड़ाने लगे…। एक के बाद एक पुरे 20 घोड्सवार अपने घोड़ों के साथ राज महल के ठीक सामने आके खड़े हुए राज महल जो मोमबत्तियो की रोशनियों से जग मगा रहा था…उसके ठीक द्वार के ऊपर दो शैतानो जैसा मुकुट बना हुआ था


जलद ही लगाम के खींचते ही राज महल के ठीक सामने घोड़े रुक गए… उन में से एक सैनिक अपने काले लिबास को ओढ़ता हुआ घोड़े से उतरा और एक बार राज महल की और देखने लगा… उसने फिर एक नज़र अपने सैनिक की और दौड़ाया और फिर उस बेहोश हालत में उस लड़की की और देखा… जिसे मज़बूती से एक सैनिक पकड़ रखा था अपनी काँधे पे उसे घोड़े पर से बेहोशी आलम में उठाते हुए सब के सब सैनिक राज महल के अंदर प्रवेश करने लगे…


“नही मुझे छोड़ दो”… जलद ही सैनिक बाज़ू में दबी उस लड़की ने करहाना शुरू कर दिया उसने अपने हाथ पाऊँ झटकने शरू कर दिए पर सैनिक को उसपर ज़रा सी भी दया न आयी और तभी सिडियो से उतारते उस शख्स ने अपनी तीखी नज़र उस लड़की पे डाली उसकी आँखों में ना जाने कैसा ख़ौफनाक दृश्य उबलने लगा उसने एक बार बड़ी निगाहों से सैनिको की और देखा और उसे ऊँगली में फसे अपने मोटे मोटे सोने की अँगूठियो को पहने हाथ से उसे अंदर ले जाने का इशारा किया


सैनिक आज्ञा का पालन करते हुए आगे बढ़ने लगे…। लडकी फिरसे हाथ पाओ झाड़ने लगी और चिल्लाने लगी…। जलद ही करीब 8 गज ज़मीन के निचे की एक गुफाः के सिडियो से निचे उतारते उतारते ही जगमग रौशनी के उस बड़े से गुफाखाने में उस लड़की को लाया गया सैनिक अपनी लिबास को एक एक करके उतारने लगे उन्होने मजबूत लोहे की ढल और खॉसी तलवार उनके चेहरे इतने सक्त और भयानक मानो जैसे एक ही चेहरे के सभी शख्स हो। चारो और अँधेरे में जलती मशाल की रोशनी थी और बीच में एक बड़ा सा ताबूत लड़की फिरसे हाथ पाओ झटकते हुए चिल्लाने लगी इस बार उसकी आवाज़ पे गौर करते हुए सबसे बड़े सैनिक ने आगे बढ़के कस्के उसके चेहरे पे एक थप्पड़ दे मारा…। चताककक…लड़की का निचला होंठ कट चुक्का था लड़की दर्द से बेहोश होने लगी


ओर कुछ ही पल वह दर्द से सिसकारियां लेने लगी…उसके निचले होंठ से खून रिस रिस के निकल रहा था। सैनिक ने अपनी भयनकर निगाहों से एक बार लड़की की और देखा और फिर दबे पाव वैसे ही खड़ा हो गया जैसे खड्डा था। कुछ ही पल में थक थक करते हुए कुछ लोगो की कदमो की आवाज़ सिडियो से आने लगी।


जलद ही ये वही शख्स उतरा जिसने अभी कुछ देर पहले सैनिको को आदेश दिया था ये थे इस राजमहल के महाराज अडोल्फ़ वलार इनकी इस राज्य के महाराज। अपने इस बेरहम और अपनी खौफनाक शखिसयत से पूरा गाओं इससे डरता था…। उसने भी लगभग अपने लोगो की तरह लाल लिबास ओढ़ रखा था चहरे पे घनिस्ट भयानक भाव आँखें ठहरी हुयी गाल की दोनों हड्डिया दिख रही थी गले तक ढाढी और सफ़ेद आँखों के बीच की कंचे भी एकदम सफ़ेद ख़ौफ़नाक मंज़र में इस खौफनाक शख्सियत को देख कोई भी सहम जाए उसने एक बार सहमी लड़की की और देखा और फिर धीरे से मुस्कराया


नही नही…। लडकी चीखने लगी उसके ज़बरन हाथ पाओ को कस्सके पकड़ा हुआ था उसे धीरे धीरे लोहे के परत जैसे पत्थर पर उलटे पाँव लेटा दिया गया और जल्द ही उसके कम्बल को खींचके उतार डाला


नही मुझे छोड़ दो नही मैं आपके आगे अपनी ज़िन्दग़गी की भीख माँगती हूँ…। लम्बे लम्बे बालो को झटकते हुए महाराजा अडोल्फ़ ने लड़की के शरीर को एक तक देखा और फिर उस ताबूत की और जाने लगा


“पागल लड़की मत चीख तुझसे पहले भी कयीनो को ऐसे ही अपनी जान गवानी पढी और तबतक गवानी पढेगी जबतके मेरे दादा श्री वलार का पुनर्जन्म नहीं हो जाता आज तेरी ये बली देखकर हम शैतानी रूहों की मदद से अपनी असीम शक्तियों के बल पे हमारे दादा को पुनर्जन्मित कर लेंगे”…। उस गरज़ते महाराजा ने अपने दोनों हाथ को उठाये दद्दाधते हुए लगभाग चिल्लाके बोलै… उसकी आवाज़ दिवार से टकरातीं हुयी गुफा में ही गुंज रही थी


लड़की एकदम काँपें जा रही थी उसके जिस्म पे एक भी कपड़ा नहीं था…। आदेष अनुसार सैनिक तुरंत पास आया और लड़की के गर्दन पे मज़बूती से अपने हाथ की पकढ़ रख ली


नही…। लडकी चीखने लगी उसकी सांसें गले में ही घुंटने लगी, महराजा ने सामने खड़े लिबास पहने सैनिक से वह बारे सा (मीट चॉपर) उठाया और धीरे धीरे लड़की के करीब आने लगा जहाँ उसे पत्थर पे लेटाया हुआ था उसकी गर्दन लगभग पत्थर के कग्गर पे थी


नही…। लडकी चीख़ने रोने लगी…उस बेहद ख़ौफ़नाक चेहरो वाले काले लीबाज़ ओढ़े बस उस खौफनाक मंज़र को देख रहे थे… मोमबतीयो की लौ फढ़पधा रही थी महाराजा ने सकती से उसे बेल्चे पे हाथो को कस लिया और जल्द ही शैतानी मंत्रो का जाप करते हुए अपने आँखों की सफ़ेद पुतलियो को उलटा लिया अब उसकी ऑंखें सफ़ेद गुलाबी ही वह चेहरा ऊपर किये मंत्र को बढ़बढ़ाये जा रहा था…लड़की मज़बूत हाथो की गिरफ़्त में थी और कुछ ही देर में चेहरे को सक्त करते हुए महाराजा ने अपने हाथ के भेळचे को ठीक हवा में उठा लिया और फिर चिल्लाते हुए आवाज़ के साथ लड़की के गर्दन पे उतार दिया।

एक बेहद ख़ौफ़नाक चीख गुफा से होते हुए पुरे राज महल और उस सन्नाटे भरी रात में गुंज उठी…। घोड़े बार चीखें निकाले सहम उठे बिजलिया खढ़क उठी


कहीं से महाराजा का चहरे पे चींथे उठ आये थे उसने एक बार अपने मुंह को खोलते हुए जुबां से इर्द गिर्द के खून को जुबां से पांच लिया और फिर उस सर कटी लाश पे नज़र दौडाईइइइ लड़की का सर धड़ से अलग हो के सीधे ताबूत के और गिरा हुआ था चारो और खून के छींटें और फ़र्श पे खून बह रहा था…। कुछ मोमबत्तिया खून के चीटों से भुज चुके थी


ये मौत का खेल कुछ ही पल में थम चुका था…। महराजा ने पास गिरे उस बेजान सर को उठा लिया लड़की की नज़रें खौफ्फ़ से वैसे ही ठहर गयी थी खून सर के निचे से टपकें जा रहा था…। धीरे धीरे ताबूत को हटा दिया ताबूत के हटते ही क़बर में साडी गाड़ी महाराजा के दादा की लाश पड़ी हुयी थी खोपडी के बिच्चू थे महाराजा ने लड़की के सर को हाथो में लिए ढ़ाँचे के ऊपर कर लिया जल्द ही टपकता खूँन ढांचे के अंदर जाने लगा और पूरा कंकाल खून से भीगने लगा


“हहहहहा बस्सस कुछ और क़ुर्बानी कुछ और क़ुराबिई और ऊस्के बाद आप अमर हो जाओ आप वापिस जी उठोगी और यही नही शैतानी इल्म का एहह खेल इस महल के आने वाले पीढ़ियों तक चलता रहेगा हाहाहाहा”…। उस हस्सी के बाद सबने महाराजा का नाम लेना शुरू कर दिया…। ताबुत को वैसे ही खुला छोड़ दिया…। महराजा अपने सैनिक के हुकम भरे आवाज़ को सुन्नन हाथ दिखाता हुआ सिडियो से ऊपर अपने कुछ शागिर्दो के साथ चला गया…उसने एक बार धीरे से सेनापति को आवाज़ दी जिसने लड़की के गर्दन को मज़बूती से पकड़ा हुआ था…अपने सफ़ेद निगाहों से खून भरे चहरे को पोंछते हुए हाथो से उसने सैनिक को लाश की तरफ इशारा करते हुए कह्


इसके जिस्म को काट काट कर अलग कर दो और इसके खून को मेरे दादा के जिस्म पे डालके उन्हें नेहलाओ और गोष्ट और हड्डीयो को विधि अनुसार जंगल जाके शैरो के आगे डाल देना…। आदेष का पालन करते हुए सैनिक ने अपने सर निचे झुकाया


“जी हुज़ूर”…इतना सुनत्ते ही सेनापति के मुँह से राजा धीरे धीरे ऊपर चला गया भेळचे से बेदर्दी से खून से सर कटी लाशः को कांटना शुरू कर दिया गया और कुछ ही देर में ताबूत के ठीक अंदर पड़े बेजान हड्डी से भरे जिस्म पे खून डाला गया  पूरी तरीक़े से लाश को भिगोके नहलाया गया जल्द ही मोमबत्तिया खून से भीग्ते हुए भुज गई पुरे गुफा में फिर वही सन्नाटा छा सा गया


ये था इस राज महल का घिनौना सच… एक ख़ौफनाक सच जो कई बरसो से इस महल पे होता आया था हर महीने गाओं से एक जवान लड़की को उठाया जाता और फिर शैतानी मंत्रो के जाप के बाद महाराजा उसकी ऐसी ही बलि चढ़ा दिया करता…गांव वाले इस्से परेशान हो उठे पर उनमें इतना साहस नहीं था की वह राजा को जवाब दे सके… महाराजा लगभग हर रोज़ ऐसे ही मासूमो के साथ मौत का खेल खेलता…। इस राज महल की सच्चाई ये थी की बरसो से इनके खानदान में तंत्र और शैतानो की पूजा हुआ करती थी यूरोप के इस राज्या में में ये वारदात करीबन काफी सालो तक चलती रही


लेकिन एकदिन दूसरे राज्या के राजा ने आक्रमण कर दिया और वैसे ही मौत का खेल खेला… उसने राजा को वैसे ही युद्धः के वक़्त प्रजाय किया और फिर उसी गुफा में उसका भी सर को बेदर्दी से धढ़ से लग कर दिया और यहीं नहीं उसके हर सैनिक और सेनापति को मौत के घांट उतार दिया गया… और सभी को उसी गुफा में डाल दिया गया…। जलद ही गुफा को राजा ने बंद कर दिया और इस तरह राज महल भी महल से एक खण्डार में तब्दील हो गया…। कुछ साल तक उस राजा ने अपना राज पत और उस महल पे राज किया लेकिंन एक के बाद एक हर राजा का सदस्य मरने लगा। और जल्द ही राजमहल फिरसे सन्नाटे में डूब गया और धीरे धीरे खण्डर में तब्दिल हो गया।

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