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Horror Story In Hindi Part 3

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Horror story in hindi part 3



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“कैसा लगा? जान मैंने क्या कहा था पूरा हॉन्टेड हाउस है हाहाहा लेकिन देखना इसके टुटने के बाद क्या आलिशान पैलेस बनेगा”…।। हफ़ीज़ ने मुस्कुराके बोल

“हम्म्म लेकिन देखके लगता है जैसे सालो से इस बंद खण्डार में एक चिड़िया भी नहीं बैठती”…। महि ने गम्भीरता से हफ़ीज़ की और देखते हुए बोला

“हाँ मैडम ये खण्डार बन चुकी है पहले कभी सा राज महल था…खैर अब आपको सर के साथ तो यहाँ रहना ही पड़ेगा आप चिंता मत कीजिये मेरा नौकर आप दोनों की देख रेख के लिए रखा जाएगा वह पास ही के छोटे से शहर से है वैसे बड़ी मुस्किल से इस खण्डार का कॉन्ट्रैक्ट सर को मिला वर्ना शहर वाले तो यहाँ किसी को आने ही नहीं देते”…।। चारलेस के आदमी ने सिगरेट सुलगाते हुए बोल

एक पल के लिए हफ़ीज़ ने चार्ल्स के आदमी को ग़ुस्से से इशारा किया और फिर उसके बाज़ू पकड़े उसे एकांत में ले जाके बोलै “स्सश्ह तुम सारे किय कराये पे पानी फेर दो असल में माहि को भूत प्रेत में कुछ ज़्यादा यकीन है तुम ऐसी बातें मत बोलो वरना डर के मारे वह यहाँ रहने से क़तरायेगी और फिर सब बेकार तुम प्लस ऐसी वैसी कोई बात नहीं बोलना उसके सामने”… हफ़ीज़ ने चार्ल्स के आदमी को समझाते हुए बोला आदमी ने ठीक वैसा ही पालन किया

दिन जल्दी ढलने को होने लगा…। राज महल में घुसते ही माहि को अजीब सी महक सी लागी। हफ़ीज़ भी चुपचाप माहि की और देखते हुए महल को घूर्णे लगा… ”वाह्ह जितना बहार से खण्डार है अंदर से उतना शानदार’ हफ़ीज़ ने मुस्कुराया…

“जी सर असल में वहां राजा का कमरा था और ये उनका लिविंग रूम आप देख रहे है ये बड़े बड़े तसवीरें ये सब राजा की ही पसंद की चीज़ थी ये नगण मुर्तिया ये मोमबत्तिया सब कुछः खैर आप लोगो को ज़्यादा परेशानी नहीं होगी हमारा नौकर सुबह की चाय से लेके अँधेरे तक आपका काम करेगा” चारलेस के आदमी ने अभी कहा ही था की माहि ने गम्भीरता से जो सवाल चढा दोनों की मुस्कराहट रुक सी गायी


माही – क्यों अँधेरा होने के बाद? वह यहाँ रुक नहीं सकते इतनी बड़ी महल तो है।

कहाँरलेस एजेंट – नहीं मेम वह असल मे यंन्न यहाँ के वासियो को यहाँ रहने की इज़ाजत नहीं है मैंने काफी कोशिश की आप लोगो के लिए रुक जाए पर उनलोगो ने नहीं मना

माही – आखिर ऐसी क्या वजह है ? जो कोई यहाँ रहना नहीं चाहता

हफ़ीज़ – अरे क्या मही तुम भी क्या सवाल लेके बैठ गई अभी हुम्हे यहाँ सिर्फ 3 महीने गुज़ारने है कौन सी पूरी ज़िन्दगी यही का हो जाना है देखो वैसे भी इस कैसल को तोड़ दिया जाएगा खैर छोड़ो इन बातों को यहाँ के लोग तो पागल है खैर हम तुमने बताया नहीं हमारे रहने का बंदोबस

कहाँरलेस एजेंट – ओह्ह , हाँ जी असल में यहाँ अभी भी राज महल के सभी सामन मजूद हैं थोड़ी साफ़ सफाई अभी करा दी गयी थी आप वहां ऊपर के वाले कमरे में रह सकते है

हफ़ीज़ – ठीक है चलो महि


कहारलेस के एजेंट ने माहि के चेहरे पे जब सवालात के घेरे देखे तो हु एक पल के लिए महल से बहार निकल गया…। कमरे में दोनों बैठे चीज़ो को देख रहे थे शाही बिस्तर जो अब भी ठीक था जिसे साफ कर दिया गया था आस पास की चीज़ें भी साफ़ थी जैसे पुराणी मुर्तिया तस्वीरें…। महि ने बैग से कपड़े निकालने शुरू कर दिया हफ़ीज़ चुपचाप कमरे को गौर करता हुआ खिड़की से बहार झाँकने लगा।


कोहरा और घना अँधेरे के साया पढने लगा दूर दूर तक जंगल और हरी घनी वादियां और दूर पे काली पहाड़ी… अँधेरा होते होते पूरी वादियों सन्नाटे और खामोशी में डूब सी गयी…। हफ़ीज़ ने खिड़की लगाया और बिस्तार पर बैठके माहि को प्यार से देखा…माहि कपड़े निकाल रही थी अचानक उसके हाथो में बिस्मिल्लाह का लॉकेट देख… हफ़ीज़ एक्पाल चौंक उठा


हफ़ीज़ – माहि ये क्या है ?

माही – मेरी फ्रेंड हिंदुस्तान गयी थी उसने कुछ चीज़ें लायी थी उस में से मैंने ये  तुम्हारे लिए ले लिया

हफ़ीज़ – माहि देखो मुझे इन सब चीज़ो पे यकीन नहीं है एंड मैं ये नही पहनने वाला हूँ प्लस इसे वापिस रख दो मैं इसे नहीं पहनुंगा

माही – तुम किस बात से खुदा से नाराज़ हो हफ़ीज़ हर कोई यहाँ तक ये बाहरी लोग भी खुदा पे अटूट यकीन करते है

हफ़ीज़ – मेरे लिए कोई खुदा नही जिसने मुझे कभी सहारा नहीं दिया कभी अपनों का सुख नहीं दिया उसे मैं क्यों मानु क्या मिला आजतक मुझे ?

माही – देखो एक बार यकीन करके देखो तुम्हें यकीन क्यों नहीं मैं तो यकीन करती हूँ आज विश्वास पे ही दुनिया कायम है जो खुदा का साथ छोड़ देता है उसकी खुदा भी मदद करना छोड़ देता है आज जो कुछ भी हो इस खुदा की बदौलत अल्लाह ने ही तो तुम्हें और मुझे मिलाया

हफ़ीज़ – ओह स’में माहि मेरे मूड को स्पोइल मत करो भूत प्रेत अल्लाह ये उपरी चीज़ें ऊपर तक ठीक है फिल्मों में अच्छी लगती है देखो मैं यहाँ काम के पर्पस में आया हूँ मुझे काम कर लेने दो मैं नहीं चाहता खामौकाः बात का बटनगढ़ बने और ख़ुशी मैं से जो आये है हु सब जाय चली जाए सो पलिस ये सब बातें मुझे मत बताया करो मैं जैसा हु खुश हूँ और मैं सिर्फ तुम्हें ही मानता हूँ सिर्फ तुम्हें महि


माही ग़ुस्से से बहार निकल गयी उसे बेहद अफ़सोस था की हफ़ीज़ एकदम भी भगवन पे यकीन नहीं करता था… लेकिन माहि को अटुट विश्वास था हफ़ीज़ ये भी जनता था की माहि इन उपरी चीज़ो को लेके काफी तर्क करती रहती है उसे यकीन होने में वक़्त नहीं लगता और अगर हवेली की बात भी उसे पता चलती तोह हु एक पल के लिए भी न खुद रहती और न हफ़ीज़ को रहने देती।। पर हफ़ीज़ उसे इन सब चीज़ो पे तो यकीन ही नहीं था वह तो बस अपने कॉन्ट्रैक्ट को बचाने के चक्कर में था


हफ़ीज़ ने काफी आवाज़ लगायी लेकिन तबतलक माहि निकल चुकी थी… उसे समझ आ गया माहि का मूड ख़राब हो चुक्का है वह बस अफ़सोस में रह गया… चार्ल्स का एजेंट कब का जा चुक्का था। नौकर खाना वाना बनके पहले से ही शाम को जा चुक्का था… अब इस महल में हफ़ीज़ और माहि के अलावा कोई नहीं था…।

“सौ साल से बंद है महल लेकिन देखके लगता है जैसे अब भी यहाँ कोई रहता हो”…। महि ने अपने बाज़ुओ पे हाथ फैरते हुए कहा


अचानक हो हो करती हवा से एक्पाल के लिए माहि सिहर गयी रात के 7 बज चुके थे महल के अंदर बस मोमबत्तिया जल रही थी। महि महल के छत्त पे टहलते हुए रंग बिरंगे उन टूटे शीशो को देख रही थी…। खंडर जैसे ही महल में लगता था जैसे अब ही कोई रहता हो…। अचानक से महि महल से बहार की और देखने लगी…। हॉऊ होऊ करते सियार की रोने की आवाज़ से माहि एक पल के लिए काँप गई हफ़ीज़ ने बताया था की पीछे की और जंगल शुरू होता है एक वक़्त यहाँ शिकारी महाराजा शिकार के लिए जाता था।


माही मोमबत्ती लिए धीरे धीरे सिडियो से निचे उतरी… उसने एक दो बार धीमें से हफ़ीज़ को बुलाना भी चाहा…लेकिन हफ़ीज़ की आवाज़ ना पाकर वह बस सिडियो से कमरे की तरफ जाने लगी अचानक से खट्ट से सीडी पे कुछ आवाज़ आई…माहि ने एक बार पीछे मुड़के देखा घाना अँधेरा कोई नहीं माहि मन का वहम समझके निचे उतरने लागी। इस बार किसी के करहाने की आवाज़ मानो जैसे दर्द में कोई गले से आवाज़ निकाल रहा हो

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