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Horror Story In Hindi Part 2

यदि आपने इस कहानी का पहला पार्ट नही पड़ा तो यहां से देख सकते हो

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Horror story in Hindi Part 2

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100 साल बाद

कहारलेस सर पे एक काली राउंड टोपी और होंठो के बीच सिगरेट्टे। एक बेष क़ीमती कोट और पैंट में अपने राइज़ केबिन में बैठे… किताब को ताकते उस शख्स पे अपनी नज़र गढ़ाये हुए था… उस शख्स ने किताब को रखते हुए चश्मे को ठीक किया और मुस्कुराके बोलै “हम्म्म तो ये ही राज महल की कहानी”…। हफ़ीज़ ने मुस्कुराके सामने बैठे चार्ल्स की और मुस्कुराते हुए बोल

“हम्म्म लोगो का कहना यही हैं और यही नही कहते है की उस राज महल में सालो तक कोई नहीं रह पाया यही देख लो जिसने राज किया वह राजा भी मरा और उसका राजपाट भी खत्म हो गया यकीन मनहूस हवेली रही होगी भला सर काटने वाले लोग को मारके कोई वहां रह सकता है भला हाहाहा”…।। चारलेस ने सिगरेट का एक खास लिया और फिर धुँआ छोड


हफ़ीज़ ने चश्मा उतारते हुए एक नज़र उस पीले पढ़े किताब के पंनो की और दौड़ाई और फिर किताब को बंद करके रख दिया…चार्ल्स ने कुछ देर तक हफ़ीज़ के सवाल भरी निगाहों को देखा और फिर उसके सवाल से पहले ही उसे सवाल जाहिर करने का इशारा कर दिया


कहाँरलेस – देखो ये प्रोजेक्ट तुम्हें मिला है और मैं तुमसे ज़्यादा कोई सवाल नहीं करूंगा अब तुम नॉर्वे के बेस्ट आर्चीटेक्ट्स में से हो तोह आपको अजीब तो लग नहीं रहा होगा की इतने पुराने ज़माने के कैसल के बारें में आपको मैं बता के डरा रहा हूँ पर ये सच्चाई है

हफ़ीज़ – तो आप इन बातों का यकीन करते है


एक पल के लिए चार्ल्स चुप रहा फिर उसने धीरे से सिगरेट को प्लेट पे मसला और फिर खासते हुए हाफीज़ को घुररके बोल


कहाँरलेस – देखो इससे पहले भी इस प्रोजेक्ट को हेनरी ने लिया था लेकिंन न जाने कैसे दिमागी संतुलन खो बैठे और एक दिन कार एक्सीडेंट में मारे गए उनका कहना था की उन्होने महल के आस पास सैनिको को देखा था।

हाफीज़ – हाहाहा अरे सर हमारा काम ही तो आर्किटेक्चर का है और मैं पहला ऐसा हिंदुस्तानी हूँ जिसे शायद इतना बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिला होगा नॉर्वे में मुझे बेस्ट बनने है और ये महल क्या है अरे सर मैंने इतने हॉन्टेड हाउस को तोड़के शीश महल खड़ा किया है की देखने वालों के मुंह से वाह निकल जाती है अब देखिये सर ये अफवाह यकीनन इस छोटे शहर के लोग डराने के लिए फैलाते हो लेकिन असल ज़िन्दगी में जो बीत गया सो बीत गया


कहाँरलेस – तो तुम्हारे कहने का मतलब है की जो हेनरी के साथ हुआ यकीनन हादसा था?

हफ़ीज़ – बिलकुल सर अगर उन्होने अपना ध्यान इधर उधर न लगा के इस प्रोजेक्ट पे लगाया होता तो शायद ही वोउल्ड बे सक्सेसफुल क्या पता शायद उनके निजी कुछ प्रोब्लेम्स हो जिस वजह से डिप्रेशन में आके anyways अब मैं चलता हु।

कहारलेस – ओके मैं तुम्हें रोकूँगा नहीं वैसे चाहो तो इस किताब को ले जा सकते हो फिर पढ़ लेना

हफ़ीज़ – हफ़ीज़ कभी किसी कॉन्ट्रैक्ट को ना नहीं बोलै है वैसे सरकार ने जब इस खण्डार को तोड़ने का फैसला कर लिया है तो वहां जा के एक बार जाएज़ा लिया जाए वहां रह के मैं अछे से बँगले का मायने करके वहां रिसोर्ट खड़ा करने में आसानी हो जाएगी और मैं अकेला हूँ सो मेरी वाइफ और मैं आराम से वहां टाइम भी बिताएंगे अकेले

कहाँरलेस – ठीक है मेरा आदमी तुम्हें अडोल्फ़ कैसल दिखा देगा फिर तुम वहां जाके अपना काम शरू कर सकते हो

हफ़ीज़ – ठीक ही है वैसे ये अडोल्फ़ कैसल हमारे शहर से कितना दूर है?

कहाँरलेस – बस दो शहर छोड़के बड़े से पाहडी में स्तिथ छोटे शहर से होते हुए घनी जंगल की वादियों के बीचों बीच ये बड़ा सा खण्डार यानि राज महल है वैसे सरकार इसे तोड़ के एक होटल पैलेस बनाना चाहती है अगर उन्हें प्रोजेक्ट पसंद आया तो मुझे यकीन है  की तुम्हें इससे भी बड़े प्रोजेक्ट के लिए चुना जाएगा।

हफ़ीज़ – ओके सर तब तो मैं कोई कसर नहीं छोड़ुंगा


हफ़ीज़ ने चार्ल्स से हाथ मिलाय और ख़ुशी मैं से किताब पे एक नज़र न दौड़ाये सिडियो से निचे उतर गया…। पूरे दिन ठण्ड की में हफ़ीज़ ने एक सिगरेट सुलगायी और पुरे रास्ते सिगरेट का कश लेते हुए घर की और जाने लगा…। हफ़ीज़ 10 साल पहले ही नॉर्वे में शिफ़्ट हुआ था इससे पहले उसने बड़े बड़े यूरोप के शहरो में अपने नाम की छाप छोड़ रखी थी कई बिल्डिंग रिसॉर्ट्स और होटल्स बनाए थे… अब तक का हफ़ीज़ का यह सबसे बड़ा सरकारी प्रोजेक्ट था जिसपे 10 अरब लगा था…। उस से आर्किटेक्चर में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद हफ़ीज़ बारे आर्किटेक्ट बन गया… हिंदुस्तान के यकीनन चुने हुए लोगो में से ये एक शैलकायत था जिसने पहली बार क़ामयाबी की ऐसी सीढ़ी हासील की थी


हाफीज़ ने इंडिया को बहुत साल पहले छोड़ दिया था माँ बाप की मृत्यु के बाद एक बड़े शैक ने हफ़ीज़ को गोद ले लिया और उसे में लाके पढ़ाया लिखाया…जल्द ही उनका इंतेक़ाल हो गया और उनके मरते ही हफ़ीज़ ने खुद को पाँव पे खड़ा कर लिया शैक की बीवी से तंग आके हफ़ीज़ ने घर छोड़ दिया और अकेले ही अपनी ज़िन्दगी बसर करने लगा


हफ़ीज़ को ना ही भूत प्रेत पे विश्वास था और ना ही विश्वास था उपरवाले पर उसके पास सबकुछ था लेकिन एक चीज़ जो उसके पास नहीं थी जिस बात का उसे हर पल खुदा से नाराज़गी थी वो था अपनापन उसे किसी से अपना प्यार नहीं मिला… धीरे धीरे हाफीज़ अपने काम को लेके ही बस उलझा रहने लगा लेकिन ज़िन्दगी ने इस अकेलेपन में एक अनचाहे अपने को दस्तक दिया…दस्तक देने वाली जो थी उसे देखकर गम अकेलापन दुःख सबकुछ एक झटके में हफ़ीज़ ने भुला दिया


ये कोई और नहीं हफ़ीज़ जिसके अंडर में ट्रैन हो रहा था उसी की इकलौती बेटी माही शेख से…माही के ज़िन्दगी में था सब्कुछ खुशिया और शरधा चोरी चोरी नज़रो से नज़रें मिली और हफ़ीज़ कॉफ़ी की मीटिंग पे माही को घुमाने ले जात।। धीरे धीरे मुलाक़ात प्यार में बदलने लगी…और हफ़ीज़ ने प्यार का इज़हार कर दिया…लेकिन माही कुछ और चाहती थी हफ़ीज़ ने उसके नज़रो को भापना और शादी के प्रस्ताव से खुश हो बैठा


ओर जल्द ही काफी मानाने के बाद माही के पापा के इज़ाज़त से दोनों ने शादी कर ली…शादी को अब 1 साल हो चुक्का था…लेकिन हफ़ीज़ ने अपने बढ़ते बोझ के माही को कोई कमी महसूस होने नहीं दी शादी के तुरंत बाद हनीमून में कैंपिंग किया घुमा फिरा काफी मौज मस्ती किया दोनों की ज़िन्दगी लगभग ख़ुशी में डूबी थी। माही इकलौती अपने पापा की बेटी थी इसलिए हफ़ीज़ को जल्द ही नॉर्वे का सिटीजनशिप मिल गया। और जल्द ही दोनों ख़ुशी पल से रहने लगी


लेकिन जब हफ़ीज़ को राज महल का कॉन्ट्रैक्ट मिला तो अब दोनों को एक नए घर में शिफ्ट होना था… हफ़ीज़ महल में रह के काम शुरू करना चाहता था ताकि महल को समझ के बिलकुल वैसा ही वह नयी इमारत खड़ी कर सके। लकिन अकेलेपन में कही रहा जाए और वह माही को एक पल के लिए खुद से अकेला नहीं करना चाहता था जल्द ही दोनों ने राज महल में शिफ्ट होने का फैसला कर लिया। और दोनों चार्ल्स के आदमी के साथ राज महल की तरफ रवाना हो गए…


घनी वादियों के बीच से गाड़ी निकलते हुए अपने मोढ़ की तरह बढ़ रही थी। हफ़ीज़ चुपचाप ठण्ड से हाथ को रगढ रहा था और माही बेहद शान्ति से वादियों को देख रही थी आगे की सिट पर चार्ल्स का आदमी सिगरेट पी रहा था और पास ही ड्राइवर भी बैठा था…हर कोई चुपचाप था…जल्द ही घनी वादियों से निकालके एक छोटा सा शहर आ गया पहाड़ी के नीचे से ये धुंध में भी कितना हसीं लग रहा था…। हफ़ीज़ एक पल निचे की और देखके महि को मुस्कुराके बोला माहि भी झाँककेँ निचे के खूबसुरत शहर को देख रही थी


जलद ही शहर के रास्तो से हटते ही जंगल शुरू हो गया महौल खुबसुरती से एकदम घनी सन्नाटे भरे जंगल के इलाकों में तब्दिल हो गया जब गाड़ी तेज़ हवओ के बीच से चल रही थी…तो चिद्या मानो जैसे हुर्र हुर्र करती हुयी गयी मानो जैसे उनके सीने में कैसा ख़ौफ़ छाया हो सब उस दौडती गाँधी की और देख रहे थे माहि की नज़र जब जानवारो पे पड़ी तो उसके ज़हन में जैसे सवालात बिखर गए लेकिन माथे पे शिखर लाके वह फिर चुप होके उस जंगल को देखने लगी।


“देखिये सर महल आ गया”…। यत्न कहते ही चार्ल्स के आदमी की बात सुन हाफीज़ ने झांक के जब सामने की और देखा तो जंगल से हटकर एक खाली इलाके में एक बड़े सा राजमहल आ गया महल की दीवारे काई पढ़ चुकी थी अजीब से शीशे जो द्वार के मुकुट पर बड़े बड़े शैतान के मुर्तिया थी वह टुटके आधी ही बची थी।


जलद ही गाड़ी द्वार के ठीक सामने आके रुकी…सब गाढ़ी से उतरे…हफ़ीज़ मुंह से भाप छोड़ता हुआ सिहरते हुए चार्ल्स के आदमी से बात करने लगा…माहि गौर गौर से राज महल के इस खण्डार को देख रही थी।

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